ECS full form – ECS का फुल फॉर्म, प्रकार, लाभ और सीमा

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नमस्कार दोस्तों! आज की इस पोस्ट में हम आपको ECS के बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारियां जैसे कि इसका पूरा नाम क्या होता है? यह क्या होता है ? तथा ECS के द्वारा क्या-क्या कार्य संपन्न किए जाते हैं? इसे प्रकार के विभिन्न तथा रोचक जानकारियां हम आपको देने का प्रयास करेंगे तो आज बिना देर किए आपको आज की इस पोस्ट के बारे में विभिन्न जानकारियां देते हैं।

ECS का फुल फॉर्म क्या होता है? (What is the full form of ECS?)

ECS का फुल फॉर्म इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस हिंदी भाषा में होता है। ECS full form is Electronic Clearing Service इंग्लिश भाषा में होता है।

Full FormCategoryTerm
Electronic Clearing ServiceBankingECS
Electronic Clearing ServicesBankingECS
Expert Control SystemComputer HardwareECS
Entity Coordinate SystemMathsECS
Eof Core SystemSpace ScienceECS
Eddy Covariance SystemPhysics RelatedECS
Ecuador SucreCountry CurrencyECS
Extreme Combat SpecialistsSportsECS
Electronic Chart SystemFile TypeECS
Equipment Concentration SiteMilitary and DefenceECS
Emergency Calling ServiceComputer and NetworkingECS
Exercise Control SystemMilitary and DefenceECS
Environmental Control SystemSpace ScienceECS
Engine Control SystemSpace ScienceECS
Emergency Communication SystemTelecommunicationECS
Event Correlation ServicesNetworkingECS
Enterprise Control StationNetworkingECS
Educator Certification SystemCertificationsECS
NewcastleAirport CodeECS

ECS क्या होता है? (What is ECS?)

ECS एक प्रकार की ऐसी व्यवस्था है, जो एक बैंक के खाते से दूसरे बैंक खाते में धन का हस्तांतरण इलेक्ट्रॉनिक तरीका तरीके से करता है। जहां ग्राहक के खाते से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट कार्ड या फिर डेबिट कार्ड के द्वारा भी इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन की सुविधा को प्रदान करता है। यह साधारण सा उन लेनदेन के लिए उपयोग में लाया जाता है जो हमारे द्वारा बार-बार किए जाते हैं।

यह भी जाने : EVS full form – EVS का फुल फॉर्म क्या होता है?

RBI अर्थात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा यह एक से अधिक बार अर्थात दोहराव दार भुगतान के लिए एक तेज तरीका प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन की सुविधा को शुरू किया गया था।

ECS के प्रकार कितने होते हैं? (How many types of ECS are there?)

चलिए अब हम ECS कर प्रकार भी आपको बता देते है। ECS मान्यता दो प्रकार के होते हैं।

ECS क्रेडिट: इस ECS में, एक संस्थान आपके बैंक खाते में क्रेडिट करता है। उदाहरण के लिए आपका लाभांश, वेतन इत्यादि। इसकी मदद से कई खातों को क्रेडिट एक ही समय पर किया जा सकता है।

ECS डेबिट:  इस प्रकार में आप अपने द्वारा लिए गए ऋण का भुगतान विभिन्न तरीकों जैसे म्यूच्यूअल फंड्स पॉलिसी के प्रीमियम इत्यादि के द्वारा कर कर सकते हैं।

ECS के क्या क्या लाभ है? (What are the benefits of ECS?)

ECS के लाभ कुछ इस तरह से है:

  • ग्राहकों की संतुष्टि को बढ़ा देता है।
  • कोई देर से भुगतान शुल्क नहीं देना होता है।
  • बिलों का समय पर भुगतान हो जाता है।
  • ग्राहकों को उनके आवश्यक उपयोगिता बिलों जैसे बिजली बिल, मोबाइल बिल, टेलीफोन बिल आदि का भुगतान करने में सुविधा प्रदान करना।
  • यह ग्राहकों को इस सेवा से म्यूचुअल फंड, बीमा प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड भुगतान, ऋण किस्त आदि के भुगतान की सुविधा भी देता है।
  • इन सभी के साथ साथ हमें अपने पैसों की सुरक्षा का प्रावधान भी मिलता है।
  • ऑनलाइन मनी ट्रांजैक्शन की वजह से हमारे पैसे भी एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षा पूर्वक पहुंचाए जा सकते हैं।

ECS की सीमा क्या है? (What is the limit of ECS?)

ECS सीमा आपके बचत/चालू खाते के ऋण पर निर्भर करता है। खाते में आपकी EMI/ECS कटौती के लिए अधिकतम डेबिट सीमा है। सीधे शब्दों में, इसका मतलब है, बैंक को आपकी EMI के लिए डेबिट लेनदेन के लिए 50k सीमा तक आपकी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों आज की इस पोस्ट जिसका शीर्षक था ECS उसके बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारियां जैसे ECS का फुल फॉर्म क्या होता है? ECS क्या होता है? ECS की सीमाएं क्या होती है? इसी प्रकार की विभिन्न जानकारियां हमने आपको आज के इस पोस्ट के माध्यम से प्रदर्शित किए हैं।

तो हमें उम्मीद है कि हमारी आज की यह पोस्ट आपके लिए आवश्यक कारगर साबित हुई होगी। हम आगे भी अपने पोस्ट की सहायता से आपके सवालों के जवाब आप तक पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे, तब तक के लिए धन्यवाद।

ईसीएस का फुल फॉर्म FAQ’s

ECS की Full Form “Electronic Clearing Service” होती है। ECS एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में धन हस्तांतरण की एक इलेक्ट्रॉनिक विधि है।
बैंकिंग नियामक RBI के मुताबिक ECS के लिए कोई फीस नहीं रखी गयी है. कई बार क्लियरिंग हाउस के हिसाब से बैंक प्रति ट्रांजेक्शन 25 पैसे या 50 पैसे चार्ज ले सकते हैं.